ब्रह्मूर्त में उठने के लाभ

Posted by Acharya Anil Johri on December 22, 2014  /   Posted in Spiritual

दिन के चौबीस घन्टों में से वेदाध्ययन, योगाभ्यास, ध्यान, कुण्डलिनी जागरण, आधात्मिक क्रियाओं व् बच्चों की पढाई हेतु यह समय सबसे उपयुक्त है | रात्रि के चतुर्थ पहर में चन्द्रमा की किरणें अमृत कणों से युक्त होने के कारण पृथ्वी पर अमृत रुपी शीतलता प्रदान करती है जो शारीरिक और मानसिक बल प्रदान करती है इसलिए प्रातः 4 बजे से साढ़े पांच बजे तक के समय को अमृत बेला भी कहा गया है | वेदों के अनुसार इस समय को ही ब्रह्म मुहर्त कहा गया है और इस समय उठने वाले पुरुष महिला व बच्चों को शारीरिक व मानसिक रोग दूसरों की अपेक्षा कम पाए जाते है क्योंकि ब्रहम मुहर्त में चल रही वायु में ऑक्सिजन की मात्रा अधिक पाई जाती है | यह बात तो वैज्ञानिक भी मानते हैं |

प्रातः काल हाथ दर्शन एवं स्मरण

अमृत बेला में उठकर सर्व प्रथम अपने दोनों हाथों को सामने से देखते हुए इस श्लोक का पाठ करना चाहिए | कराग्रे वसते लक्ष्मी ; कर मध्य सरस्वती | करमूले स्थिता गौरी प्रभाते कर दर्शनम |

हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती, तथा मूल भाग में मणिबन्ध के पास माँ गौरी निवास करती हैं | हाथों को कर्मों का प्रतीक रूप माना गया है और कर्मों को सम्पन करने में माँ लक्ष्मी एवं माँ सरस्वती अर्थात धन एवं बुद्धि यानि ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | ज्ञान और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए हमारे हाथों से समस्त क्रियाएँ हों यही भावना मन में धारण करके प्रात कर दर्शन का विधान तय हुआ है | इस के इलावा भाग्य को प्राप्त करने के लिए भी इन्हीं हाथों द्वारा कर्मों को करने की आवश्यकता होती है | अतः अमृत बेला में यानि प्रात उठकर कर दर्शन के पश्चात् हाथों को अपने मस्तक पर लगा कर हमें अपना दिन प्रारम्भ करना चाहिए |

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Acharya Anil Johri

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