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गौरी शंकर रुद्राक्ष

गौरी शंकर रुद्राक्ष भगवान शिव एवं माँ पार्वती का प्रत्यक्ष स्वरूप है | इसके धारक को शिव और शक्ति दोनों की कृपा प्राप्त होती है |

गौरी शंकर रुद्राक्ष के लाभ

यह रुद्राक्ष गृहस्थ सुख के लिए अति शुभ माना गया है क्योंकि जिन भगवान शिव और माँ पार्वती के 36 गुण मिलते थे यह रुद्राक्ष उन्हीं का स्वरुप है इसलिए जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा है, बहुत प्रयास करने के बाद भी अच्छा रिश्ता ना मिल रहा हो उन कन्याओं को यह रुद्राक्ष अति शीघ्र धारण करना चाहिए और जिन कन्याओं का विवाह तो हो चुका है लेकिन गृहस्थ सुख की किसी भी रूप में कमी हो रही है तो उन स्त्रियों के लिए भी गौरी शंकर रुद्राक्ष अति उत्तम फल प्रदायक माना गया है | जिन स्त्रियों को गर्भ से सम्बंधित कोई समस्या हो उनके लिए भी यह लाभकारी हो सकता है | पारिवारिक शांति और वंश वृद्धि में भी यह रुद्राक्ष सहायक माना गया है | गौरी शंकर रुद्राक्ष बाज़ार में नकली भी बनाए जाते हैं इसलिए विश्वसनीय स्थान से ही खरीद के धारण करने चाहिए | पुरुषों को इस रुद्राक्ष को चांदी की कटोरी में स्थापित करके केमिकल रहित सुगन्धित द्रव्य से अभिमंत्रित करना चाहिए | पुरुषों को सभी रुद्राक्ष का कंठा धारण करने के अतिरिक्त इस रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए | यह रुद्राक्ष शिव पार्वती के आशीर्वाद से अर्धनारीश्वर का स्वरुप है इसलिए सभी उम्र की स्त्रियों को इसे धारण करना चाहिए ताकि जीवन में हर प्रकार की सुख शान्ति प्राप्त की जा सके |

गौरी शंकर रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण तो “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से किया जा सकता है लेकिन इसको धारण करने के पश्चात एक माला “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ नमः दुर्गाए” और “ॐ अर्ध्नारिश्वराए नमः” की जाए तो अति उत्तम फल की प्राप्ति अति शीघ्र कराने में इस रुद्राक्ष का कोई मुकाबला नहीं है |

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*Descriptions for products are taken from scripture, written and oral tradition. Products are not intended to diagnose, treat, cure, or prevent any disease or condition. We make no claim of supernatural effects. All items sold as curios only.

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गणेश रुद्राक्ष

जैसा की आप सभी जानते हैं कि गणेश भगवान शिव और पार्वती के पुत्र हैं इसलिए गणेश रुद्राक्ष को विशेष रूप से शिव और शक्ति दोनों का ही आशीर्वाद प्राप्त है |

गणेश रुद्राक्ष के लाभ

भगवान गणेश के जन्म के पश्चात शिव और पार्वती के अतिरिक्त स्वर्ग के सभी देवी देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया था कि आप सभी ब्रह्माण्ड वासियों के विघन हरने में सक्षम हो तभी से भगवान गणेश को विघन हरता भगवान माना गया है अतः गणेश रुद्राक्ष स्पष्ट रूप से भगवान गणेश का स्वरुप होने के कारण से सभी प्रकार के विघन हरने में सहायक होता है | सभी प्रकार के भूत प्रेत भगवान शिव के अनुयायी होने के कारण से सभी की गणपति भगवान को विशेष कृपा प्राप्त है इसलिए गणेश रुद्राक्ष धारण करने से सभी प्रकार की उपरी बाधाएं शीघ्र उस शरीर को छोड़ देती हैं |

गणेश रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ गं गणपतय नमः” है | 32 दानों की माला इस रुद्राक्ष की धारण करके “ॐ गं गणपतय नमः” मन्त्र का यदि जाप किया जाए तो जीवन के समस्त विघन धीरे धीरे कम होते चले जाते हैं ऐसा कई ग्रंथों में लिखा है अतः स्त्री, पुरुष, नौकरी करने वाले या व्यापारी, राजनेता, कलाकार या सरकारी अफसर सभी को इस रुद्राक्ष को धारण करके अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए |

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पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष

भगवान शिव को पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष अत्यन्त प्रिय है क्योंकि यह स्वयं भगवान शिव के स्वरूप पशुपति नाथ का प्रतीक है | भगवान के इसी स्वरूप के नाम पर ही नेपाल में भव्य मन्दिर के रूप में दिव्य पीठ की स्थापना हुई है |

पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

शिव के 1008 नामों में पशुपति बहुत ही प्रसिद्ध नाम है इसलिए भी इस रुद्राक्ष का बहुत महत्व है | भगवान शिव के पशुपति नाथ स्वरूप के हाथों में कई पुराने अस्त्र शस्त्र हैं जिनका सबका अलग अलग प्रभाव कहा गया है | पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले जातक को ह्रदय रोग में लाभ रहता है और आँखों व गले के रोगों पर भी यह रुद्राक्ष अच्छा असर करता है | मस्तिष्क की कल्पना शक्ति पर भी इसका अच्छा असर होता है | पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष भूमि के काम करने वालों के लिए और भूमि खरीदने में भी लाभकारी हो सकता है | मानसिक रोगों में भी इसके धारण से लाभ प्राप्त किया जा सकता है | शनि, राहू, मंगल आदि पाप ग्रहों के कुप्राभाव को कम करने में भी यह रुद्राक्ष सहायक सिद्ध होता है इसलिए कलयुग में हम सभी को यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए |

पन्द्रह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने के लिए मृतुन्जय मन्त्र का पाठ करना लाभकारी रहता है लेकिन अगर मृतुन्जय मन्त्र मुश्किल लगता हो तो सिर्फ “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र का पाठ करके भी इसे धारण किया जा सकता है | इसको लाल या काले धागे में धारण करना चाहिए या माला में सुमेरु के स्थान पर लगाना चाहिए |

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चौदा मुखी रुद्राक्ष

सभी रुद्राक्षों में से गोल एक मुखी के पश्चात चौदा मुखी रुद्राक्ष को सबसे अधिक मान्यता प्राप्त है | यह रुद्राक्ष स्पष्ट रूप से भगवान शिव के रूद्र मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्री राम जी के अनन्य भक्त भगवान श्री हनुमान जी का स्वरुप माना गया है |

चौदा मुखी रुद्राक्ष के लाभ

जिस प्रकार हनुमान जी का नाम लेने से सभी भूत प्रेत भाग जाते हैं उसी प्रकार इसको धारण करने से समस्त प्रकार की ऊपरी बाधाएं धीरे धीरे समाप्ति की और चल पड़ती हैं | जन्मपत्री में कंटक शनि व राहू की दशा का कुप्रभाव अगर कोई व्यक्ति भोग रहा हो तो उसके लिए चौदा मुखी रुद्राक्ष का धारण करना राम बाण औषधि की तरह माना गया है | नित्य प्रति इस रुद्राक्ष को अपने मस्तक का स्पर्श मात्र करा लेने से मान सम्मान की प्राप्ति होती है | मानसिक तनाव दूर होता है और मन को दृण निश्चय एवं संकल्पित करने में मदद मिलती है | जिन बच्चों का पढाई में मन ना लगता हो या बुद्धि से थोड़े कमज़ोर माने जाते हों उन बच्चों को छह मुखी के साथ चौदा मुखी रुद्राक्ष धारण करने से विदध्या बुद्धि के क्षेत्र में अति उत्तम फल की प्राप्ति की जा सकती है | सभी प्रकार की आध्यात्मिक उर्जा व ज्ञान के लिए भी यह रुद्राक्ष अति उत्तम माना गया है | पूर्व समय में राजा महाराजा चौदा मुखी रुद्राक्ष को अपने मुकुट में धारण करते थे | आजकल वैसा चलन ना होने के कारण वह संभव नहीं है लेकिन यदि किसी प्रकार इस रुद्राक्ष को दोनों नेत्रों के मध्य मस्तक पर धारण किया जा सके तो इसके शुभ फल की तुलना नहीं की जा सकती लेकिन हनुमान जी की कृपा प्राप्त होने के कारण से गले में धारण करके नित्य प्रति पांच माला “ॐ नमः शिवाय” का जाप करके मस्तक मात्र पर इसका स्पर्श करा लेने से पूर्ण फल की प्राप्ति की जा सकती है |

चौदा मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मन्त्र “ॐ नमः” है लेकिन यदि इसको धारण करके मृत्युंजय मंत्र का पाठ किया जाए तो अति उत्तम फल की प्राप्ति की जा सकती है |

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तेरह मुखी रुद्राक्ष

तेरह मुखी रुद्राक्ष साक्षात स्वर्ग के राजा भगवान इन्द्र देव का स्वरुप है | कामदेव का आशीर्वाद प्राप्त होने के कारण से इसके धारण करने से सभी प्रकार की कामनाएँ पूर्ण होती हैं |

तेरह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

तेरह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से दरिद्रता का नाश होकर सभी प्रकार के भोगों की प्राप्ति होती है | सिद्धि साधना के लिए भी यह रुद्राक्ष उपयुक्त माना गया है | यह स्त्री-पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य रखता है इसलिए वशीकरण में भी सहायक माना गया है | गृहस्थ सुख में भी लाभ होता है | तेरह मुखी रुद्राक्ष को ग्रहों को अनुकूल करने के लिए भी धारण किया जाता है | महालक्ष्मी जी की कृपा भी प्राप्त होने के कारण से शुक्र ग्रह पर इसका विशेष प्रभाव माना गया है | भगवान इन्द्र को स्वर्ग का शासन पुनः प्राप्त करने में भी तेरह मुखी रुद्राक्ष का प्रभाव था एैसा कई ग्रंथों में विवरण मिलता है | उच्च पद पर काम करने वाले या कला के क्षेत्र में काम करने वाले सभी जातकों को तेरह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए और इसके साथ बारह और चौदा मुखी रुद्राक्ष भी अगर धारण कर लिया जाए तो अति उत्तम फल की प्राप्ति की जा सकती है इसमें कोई अतिशोक्ति नहीं है | महाशिवपुराण के अनुसार कामदेव का रूप होने के कारण से उन सभी लोगों को भी यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए जिनके जीवन में प्यार की या गृहस्थ सुख की कमी हो | निष्कर्ष के फलस्वरूप सभी को यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और शिव के बीज मंत्र का नियमित पाठ करना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लाभ अपने जीवन में प्राप्त किया जा सके |

तेरह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं नमः” है | इसको धारण करने के पश्चात इसी मंत्र की या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र की पांच माला नित्यप्रति जाप करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सभी सुख साधन प्राप्त होते हैं |

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बारह मुखी रुद्राक्ष

बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान महाविष्णु का स्वरुप माना गया है | बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित है इसलिए भगवान सूर्य देव की विशेष कृपा का भी पात्र है यह रुद्राक्ष |

बारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

इसको धारण करने मात्र से असाध्य व भयानक रोगों से मुक्ति मिलती है | ह्रदय रोग, उदार रोग व मस्तिष्क से सम्बन्धित रोगों में इस रुद्राक्ष को धारण करने से लाभ हो सकता है ऐसा कई ग्रन्थों में लिखा मिलता है | बारह मुखी रुद्राक्ष को कंठ में या कान के कुण्डल में धारण करने से भगवान विष्णु व सूर्य देव दोनों ही अति प्रसन्न होते हैं | इस रुद्राक्ष को द्वादश आदित्यों की कृपा प्राप्त होने से अश्वमेघ यज्ञ सहित कई यज्ञों का फल प्राप्त होता है | बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से तन और मन स्वस्थ होते हैं और एक विशेष प्रकार की शक्ति उत्पन्न होती है | राजनीति व सरकारी क्षेत्रों में काम करने वाले जातकों के लिए बारह मुखी रुद्राक्ष अति उत्तम माना गया है | गोवध करने वाले पापी व रत्नों की चोरी करने जैसे महापाप में भी इस रुद्राक्ष के धारण करने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और पापों से व्यक्ति मुक्त हो जाता है एैसा हमारे ग्रन्थों में कहा गया है | यह रुद्राक्ष क्षत्रुओं का नाश करके व्याधियों का नाश करके सूर्य आदि ग्रहों के कमज़ोर प्रभाव को नष्ट करके सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति करवाता है इसलिए इस रुद्राक्ष को सभी को धारण करना चाहिए |

बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ क्रोम श्रोम रोम नमः” है | इस मंत्र की तीन माला या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र की पांच माला या मृत्युंजय मंत्र की एक माला नित्य प्रति करने से समस्त प्रकार के रोगों से व समस्याओं से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है और लाभान्वित हुआ जा सकता है अतः सभी को भगवान सूर्य और भगवान विष्णु के स्वरुप रूपी बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए |

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ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

भगवान शंकर जिनके अक्ष की आंसू से रुद्राक्ष उत्पन्न हुआ है उन्हीं भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों का प्रतीक है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष | इसके धारक को भगवान शंकर की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम रुद्राक्ष माना गया है |

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

महाशिवपुराण के अनुसार इस रुद्राक्ष को शिखा में बांधना चाहिए या गले में धारण करना चाहिए | इसको धारण करने से और इसके ऊपर मन्त्रों के जाप करने से धीरे धीरे अश्व्मेघ यज्ञ का फल भी प्राप्त हो सकता है | व्यापारियों के लिए ग्यारह मुखी रुद्राक्ष अति उत्तम फल प्रदान करने वाला माना गया है | भाग्य वृद्धि और धन सम्पत्ति व् मान सम्मान की प्राप्ति के लिए इसे अवश्य धारण करना चाहिए | साक्षात एकादस रूद्र रूप होने से यह जातक को रोग मुक्त करने में भी सहायक होता है और धार्मिक अनुष्ठान, पूजा पाठ में भी उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है | राजनीति, कूटनीति व् हर प्रकार के क्षेत्र में ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का धारक सर्वत्र विजय होता है | यह एक सफल एवं उत्तम रुद्राक्ष माना गया है इसलिए हनुमान जी की उपासना करने वाले एवं व्यापार करने वाले हर व्यक्ति को इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए |

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं हूं नमः” है | इसको धारण करने के पश्चात नित्य प्रति पांच माला “ॐ नमः शिवाय” या तीन माला ऊपर लिखे हुए मंत्र की या एक माला मृत्युंजय मंत्र की जाप करनी चाहिए ताकि भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों सहित मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्री राम जी के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की भी कृपा प्राप्त की जा सके | पांच मुखी रुद्राक्ष की माला में ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को सुमेरु के रूप में लगाकर धारण करना अति उत्तम कहा गया है |

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दस मुखी रुद्राक्ष

दस मुखी रुद्राक्ष साक्षात रूप से भगवान विष्णु का स्वरुप माना गया है | जन्मपत्री में कोई भी अशुभ ग्रह हो उसके प्रभाव को कम करने के लिए यह रुद्राक्ष अति उत्तम माना गया है |

दस मुखी रुद्राक्ष के लाभ

दस रुद्रों का आशीर्वाद होने के कारण से भूत प्रेत, डाकिनी शाकिनी, पिशाच व् ब्रह्म राक्षस जनित ऊपरी बाधाएं व् जादू टोने को दूर करने में सहायक होता है | क़ानूनी परेशानियों में भी दस मुखी रुद्राक्ष लाभदायक है | विष्णु जी का स्वरुप होने के कारण से धारक के प्रभाव को दसों दिशाओं में फैलता है | तंत्र मंत्र की साधना करने वाले साधकों के लिए यह रुद्राक्ष अति उत्तम माना गया है | इसको धारण करके साधना करने से सिद्धि में सहायता प्राप्त होती है | सर्प आदि के काटने के भय से बचाकर दस मुखी रुद्राक्ष पूर्ण आयु प्राप्त करवाने में सहायक सिद्ध होता है | ग्रह बाधा के कारण जिस जातक का भाग्य उदय ना हो रहा हो उसके लिए भी दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना गया है | ग्रन्थों के अनुसार विष्णु जी की कृपा होने के कारण से इसके धारक को दमा, गठिया, शएतिका व् पेट और नेत्रों के रोग में लाभ हो सकता है | असाध्य रोगों से छुटकारा भी मिल सकता है ऐसा कई ग्रन्थों में वर्णित है इसलिए सभी को अपने कल्याण के लिए दस मुखी रुद्राक्ष को सोमवार के दिन शिवलिंग से स्पर्श कराके धारण करना चाहिए |

दस मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र है “ॐ ह्रीं नमः” | इस रुद्राक्ष को धारण करके ऊपर लिखे मंत्र की या “ॐ नमः शिवाय” की पांच माला जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है |

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आठ मुखी रुद्राक्ष

भगवान शिव एवं माँ पारवती के प्रिय पुत्र विघनहारक भगवान गणेश जी आठ मुखी रुद्राक्ष के प्रधानदेवता माने गए हैं | आठ मुखी रुद्राक्ष भैरोदेव का स्वरुप माना गया है |

आठ मुखी रुद्राक्ष के लाभ

यह रुद्राक्ष के धारण करने से उच्च पद की प्राप्ति व् मन की एकाग्रता में सुधार होता है | यह रुद्राक्ष ऋद्धि सिद्धि दायक है | जीवन में जितनी भी मुश्किलें और विघन होते हैं उनको दूर करने में आठ मुखी रुद्राक्ष सहायक सिद्ध होता है | जिस प्रकार शास्त्र अनुसार सर्वप्रथम श्री गणेश भगवान की पूजा की जाती है उसी प्रकार इस रुद्राक्ष को भी निसंकोच व् बिना किसी जानकारी के भी धारण कर लेना चाहिए क्योंकि महाशिवपुराण के अनुसार आठ मुखी रुद्राक्ष बुद्धि, ज्ञान, धन, यश और उच्च पद की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है | जो व्यापारी किसी भी प्रकार से नापतोल में बईमानी करते हैं शास्त्रानुसार वह व्यापारी पाप के भागी बनते हैं और जो व्यक्ति अपने जीवन में पर इस्त्री के संपर्क में रहते हैं वह भी पाप के भागी होते हैं | ग्रंथों के अनुसार एैसे पापियों को भी आठ मुखी रुद्राक्ष के धारण करने से पाप मुक्त होने में सहायता मिलती है | एैसा माना गया है की यह दोनों रुद्राक्षों को धारण करने वाले जातक को मृत्योपरांत शिवलोक की प्राप्ति होती है |

आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

इसको धारण करने का मंत्र भी “ॐ हूँ नमः” है | जैसा की सात मुखी के विवरण में हमने लिखा है कि आठ मुखी के साथ धारण करना चाहिए उसी प्रकार इस रुद्राक्ष को भी सात मुखी के साथ धारण करना चाहिए क्योंकि माँ लक्ष्मी और गणेश भगवान जी की पूजा साथ में करने का विधान है |

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सात मुखी रुद्राक्ष

सात मुखी रुद्राक्ष को माँ लक्ष्मी की कृपा से भरपूर माना गया है | कामदेव का स्वरुप पाने वाला यह रुद्राक्ष अनन्त नाम से जाना गया है | महाशिवपुराण के अनुसार स्वर्ण आदि धातुओं की चोरी या बेईमानी करने के पाप से मुक्ति प्रदान करने में यह रुद्राक्ष सहायक माना गया है |

सात मुखी रुद्राक्ष के लाभ

एैसे मनुष्य जिनका भाग्य उनका साथ नहीं देता और नौकरी या व्यापार में अधिक लाभ नहीं होता एैसे जातकों को सात मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए क्योंकि इसके धारण से धन का अभाव व् दरिद्रता दूर होकर व्यक्ति को धन, सम्पदा, यश, कीर्ति एवं मान सम्मान की भी प्राप्ति होती है चूँकि इस रुद्राक्ष पर लक्ष्मी जी की कृपा मानी गई है और लक्ष्मी जी के साथ गणेश भगवान की भी पूजा का विधान है इसलिए इस रुद्राक्ष को गणपति के स्वरुप आठ मुखी रुद्राक्ष के साथ धारण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है | ग्रन्थों के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष पर शनि देव का प्रभाव माना गया है इसलिए जो व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हों या जोड़ो के दर्द से परेशान हों उनके लिए शनि देव की कृपा प्राप्त होने के कारण से यह रुद्राक्ष लाभदायक हो सकता है | सात मुखी होने के कारण से शरीर में सप्त धातुओं की रक्षा करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को दुरुस्त करता है |

सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र

सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ हूँ नमः” है | इस रुद्राक्ष को धारण के पश्चात इसी मंत्र की तीन या पांच माला रोज़ अगर जाप किया जाए तो इस रुद्राक्ष की क्षमता कई सो गुना बढ़ जाती है और धारक को धन एवं यश की प्राप्ति होती है अतः हर नौकरी या व्यवसाय करने वाले मनुष्य को सात मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए |

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