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वेदों का नेत्र ज्योतिष

माँ सरस्वती जी की वन्दना के पश्चात्, ज्योतिष के विषय में इतना बताना चाहूँगा कि ज्योतिष शास्त्र में कल्पना के लिए कोई स्थान नहीं है, यह विशुद्ध विज्ञान है | आज के आधुनिकतम विज्ञान का रहस्य इसके गर्भ से ही निकलता है | ज्योतिष शब्द की व्युत्पति ज्योति से हुई है | ज्योति का अर्थ है प्रकाश | जिस ज्ञान के शब्दों से प्रकाश की किरणें निकलती हों ऐसे शब्दों के सार को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है | आज से सहस्त्रो वर्ष पूर्व ‘श्री सूर्य, भृगु, अत्री कश्यप, बृहस्पति, पाराशर आदि महर्षियों ने लोक कल्याण हेतु इस विद्या को प्रकाशित एवं प्रचलित किया था |
Astrology is a science which has come down to us as a gift from Ancient Rishis.

हिन्दू धर्म में चार वेदों को मान्यता प्राप्त है – ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद और यजुर्वेद जिन्हें सभी विद्याओ का मूल माना जाता है | इन्हीं वेदों में से ऋग्वेद के छठे अंग को ज्योतिष कहा गया है इसीलिए ज्योतिष को ज्योतिषामयनं चक्षुः यानि वेदों का नेत्र भी कहा गया है | जिस प्रकार नेत्रों से विभिन्न वस्तुओ की गतिविधियों को देखा जाता है, उसी प्रकार से ज्योतिष शास्त्र द्वारा भूत, भविष्य एवं वर्तमान काल में घटने वाली घटनाओं की जानकारी मिल सकती है | चन्द्रमा की शीतलता के प्रभाव से समुद्र में ज्वार भाटा आता है | सूर्य की गर्मी से कोणार्क में फसलें पकती है यह बात हम सभी जानते हैं | उसी प्रकार से सूर्य, चन्द्र व अन्य ग्रहों का पृथ्वी व पृथ्वी वासियों पर प्रभाव पड़ता है |

ज्योतिष के दो विभाग होते हैं – गणित एवं फलित | गणित द्वारा ब्रह्माण्ड में ग्रहों की स्थिति एवं फलित द्वारा ग्रहों का जीवन पर असर देखा जाता है | इन्सान का जीवन और सुख दुख, इनका आपस में अटूट रिश्ता है | इस अटूट बन्धन में ज्योतिष का अपना महत्व है यह बात भविष्य पुराण, स्कन्द पुराण, नारद संहिता, वृहद सहिंता आदि ग्रंथों से प्रमाणित होती है | मानव कर्मशील होते हुए ग्रह चाल के अनुसार चलने को विवश है | प्रारब्ध के फल सवरूप मानव को लाभ-हानि, मान-सम्मान, अच्छे बुरे फल भोगने पड़ते है | पिछले 30 वर्षो के अनुसंधान में हमने पाया कि रत्न, रुद्राक्ष एवं मन्त्रों से ग्रहों के शुभ प्रभाव को बढाया एवं अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है जिससे जीवन में खुशहाली प्राप्त की जा सकती है |

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