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मासिक व्रत एवं पर्व

वर्ष 2015 में हर महीने के प्रारम्भ में हम उस मास के सर्व कल्याणकारी व्रत पर्व एवं पूजा बतायेंगे जिसको करके आप लाभान्वित हो सकते हैं |

यह वर्ष पुत्रदा एकादशी जैसे अति शुभ दिन से प्रारम्भ हो रहा हे | 1 जनवरी को पुत्रदा एकादशी का पावन पर्व है | इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री राधा कृष्ण का पूजन विधि विधान से करके, राधा कृष्ण स्रोत्र का पाठ करना चाहिए | कृष्ण भगवान जी के बाल स्वरूप के दर्शन करके “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” का पाठ करके, वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन करवाके, यथाशक्ति दान आदि देकर आशीर्वाद प्राप्त करने से पुत्र की प्राप्ति होती है अतः जिन माताओं बहनों को सन्तान कष्ट हो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए |

गणेश संकट चतुर्थी व्रत – 8/1/2015

इसे गौरी चतुर्थी, सौभाग्य सुन्दरी व्रत एवं वक्रतुंड चतुर्थी भी कहा जाता है | इस दिन व्रत रख के गणपति का पूजन करें और सायेंकाळ में सवा पांच किलो का एक ही देसी घी का लड्डू मन्दिर जाकर भगवान गणपति को भोग लगायें और प्रसाद बाँट कर स्वयं भी खाएँ | रात्रि में चन्द्रमा निकलने के पश्चात चन्द्र देव का पूजन करके “ॐ सोम सोमाय नमः” का पाठ करके चन्द्र देव को अर्द्ध देना चाहिए | इस व्रत को जनवरी मास से प्रारम्भ करके सारा साल हर महीने चतुर्थी के दिन करने से हर प्रकार के विघ्न समाप्त होने लग जाते है |

लोहड़ी पर्व – 13/1/2015

यह पर्व उत्तर भारत में मनाया जाता है | इस दिन अग्नि देव की पूजा की जाती है | उत्तर भारत में इस पर्व को भाईचारे के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है | अग्नि देव को तिल की रेवड़ियों का भोग लगाया जाता है | अग्नि देव की पूजा की जाती है और उसके पश्चात सभी लोग मिलकर खूब नाचते गाते हैं | इस नाच को भांगड़ा व गिद्धा कहते हैं | बीच में लकड़ियाँ जलाकर उसमें तिल की रेवड़ी व मूंगफली की आहूति डालकर उसके चारों ओर नाच गाकर इस त्यौहार को मनाया जाता है |

मोनी अमावस्या – 20/1/2015

माघ मास में मंगलवार के दिन अगर मोनी अमावस्या आ जाए तो इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है | विशेषकर इस दिन तीर्थ स्थान पर जाकर दान करने का विधान है लेकिन अगर तीर्थ स्थान पर न भी जा सकें तो अपने घर पर वेदपाठी ब्राह्मण को आदर सहित बुलाकर उन्हें भोजन कराके तिल के लड्डू, फल व उनी वस्त्र भेंट करना चाहिए | इस दिन प्रयास करके मौन रहना चाहिए | कम बोलकर अमावस्या का व्रत करके ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा आदि देने से अक्षय फल की प्राप्ति की जा सकती है |

वसन्त पंचमी – 24/1/2015

माँ सरस्वती का पूजन इस दिन विशेष फलदायक होता है | इस दिन धूप दीप, गुलाल व फूलों से माँ सरस्वती का पूजन करके पीले मीठे चावलों का भोग लगाकर स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए |

तिल द्वादशी – 31/1/2015

इस दिन जल में तिल डालकर स्नान करके भगवान श्री विष्णु जी का पूजन करें | तिल के तेल का दीपक जलाएं और हवन में तिल की ही आहुति डालें | तिल की ही मिठाई का भोग लगायें | तिल का ही भोजन करें व कराएँ | तिल ही दान करें दक्षिणा सहित | इस प्रकार इस व्रत को करने से जीवन की सम्पूर्ण व्याधियां दूर होकर सुख शान्ति की प्राप्ति होती है |

इस प्रकार जनवरी मास के इन पर्वों को करके आप लाभान्वित भी हो सकते हैं और उपवास करने से शरीर को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है |

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