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नव वर्ष 2015 का resolution

मैं सुखी हो जाऊँ यह स्वार्थ चिन्तन है शहर सुखी हो जाये यह धर्मार्थ चिन्तन है जगत सुखी हो जाये यह परमार्थ चिन्तन है | अगर हम परमार्थ चिन्तन करते है तो यह बहुत अच्छा है लेकिन अगर हम धर्मार्थ चिन्तन भी करें तो यह भी अच्छा है लेकिन केवल स्वार्थ चिन्तन उपयुक्त नहीं है | आओ आज वर्ष 2015 के पहले दिन हम यह संकल्प करें कि इस वर्ष में केवल अपनी चिंता न करके बल्कि अपने समाज व शहर की भी चिंता करते हुए किसी एक आदमी के दुख को भी कम कर सकें तो जरुर करेंगे | जिस प्रकार देश के प्रधान मंत्री जी ने एक झाड़ू उठाया तो सारे भारत में सफाई अभियान शुरू हो गया उसी प्रकार यदि आप एक आदमी का भी भला सोचेंगे तो यकीनन सारे शहर का भला हो जायेगा | तो इस साल हम सब मिलकर धर्मार्थ चिन्तन अवश्य करेंगे | यही वर्ष 2015 का resolution होना चाहिए |

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